केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने चेन्नई में ब्रिक्स विज्ञान मंत्रिस्तरीय बैठक में उद्घाटन भाषण दिया
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने चेन्नई में ब्रिक्स विज्ञान मंत्रिस्तरीय बैठक में उद्घाटन भाषण दिया
चेन्नई: 14वीं ब्रिक्स विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (STI) मंत्रिस्तरीय बैठक की शुरुआत यहाँ केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के उद्घाटन भाषण के साथ हुई। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक पहुंच को रेखांकित किया।
ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत ने 2026 में अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण" (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) को थीम चुना है। यह थीम इस साझा विश्वास को दर्शाती है कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को लचीलापन बढ़ाकर, समावेशी विकास को गति देकर, सतत विकास को बढ़ावा
देकर और राष्ट्रों के बीच न्यायसंगत साझेदारी को मजबूत करके मानवता की सेवा करनी चाहिए।डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि दुनिया आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम प्रौद्योगिकियों, उन्नत सामग्रियों, जैव प्रौद्योगिकी (बायोटेक्नोलॉजी), फोटोनिक्स, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों (जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी) और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग जैसी उभरती तकनीकों के कारण तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रही है। जहां ये प्रौद्योगिकियां प्रगति के अभूतपूर्व अवसर पैदा कर रही हैं, वहीं वे यह सुनिश्चित करने के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मांग भी करती हैं कि नवाचार सुलभ, किफायती, भरोसेमंद और टिकाऊ बना रहे।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स अपनी विशाल आबादी, वैज्ञानिक प्रतिभा और बढ़ती अनुसंधान क्षमताओं के साथ एक सहकारी, जिम्मेदार और भविष्योन्मुखी नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह सक्षम है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने संवाद को बनाए रखने और इसे व्यावहारिक सहयोग व ठोस परिणामों में बदलने के लिए एसटीआई (STI) संचालन समिति, वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न एसटीआई कार्य समूहों के योगदान की भी सराहना की।मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स एसटीआई सहयोग अनुसंधान सहयोग, नवाचार साझेदारी, युवा वैज्ञानिक आदान-प्रदान, अनुसंधान बुनियादी ढांचे और विषयगत कार्य समूहों को शामिल करते हुए एक मजबूत मंच के रूप में विकसित हुआ है।
भारत की अध्यक्षता के दौरान, उभरते वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्रों तथा समाजों की विकासात्मक आकांक्षाओं के साथ सहयोग को संरेखित करने के लिए ब्रिक्स एसटीआई प्राथमिकताओं की एक व्यापक समीक्षा की जा रही है।डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत विज्ञान और नवाचार के लिए एक खुले, समावेशी और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन, बायोE3 नीति, राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति और विस्तारित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) पारिस्थितिकी तंत्र सहित भारत की पहलों का उल्लेख किया, जो एक ऐसे दृष्टिकोण को दर्शाते हैं जहां नवाचार अंततः लोगों के जीवन में सुधार करता है, सामाजिक लचीलेपन को मजबूत करता है और सतत आर्थिक परिवर्तन का समर्थन करता है।मंत्री ने ब्रिक्स भागीदारों को अग्रणी अनुसंधान, नवाचार वित्तपोषण, प्रतिभा गतिशीलता, अनुसंधान बुनियादी ढांचा साझाकरण, स्टार्टअप साझेदारी और क्षमता निर्माण में गहरे सहयोग के लिए महत्वाकांक्षी लेकिन व्यावहारिक रास्ते तलाशने के लिए आमंत्रित किया।
उन्होंने कहा कि ऐसा सहयोग एक भविष्य के लिए तैयार ब्रिक्स एसटीआई संरचना बनाने में मदद कर सकता है जो वैश्विक चुनौतियों के प्रति संवेदनशील हो और ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं का समर्थन करती हो।डॉ. जितेंद्र सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि चेन्नई में होने वाला यह विचार-विमर्श ब्रिक्स साझेदारी की भावना को और मजबूत करेगा तथा एक अधिक सुदृढ़, नवाचारी और सतत विश्व के निर्माण में सार्थक योगदान देगा।


