अंतरराष्ट्रीयअपराधई-पेपरराजनीतिराष्ट्रीय

जालंधर में नगर निगम के आदेशों को ठेंगा? डॉ. रोहित हेल्थ केयर सेंटर की बिल्डिंग में दूसरी मंजिल के निर्माण पर उठे सवाल

नगर निगम द्वारा निर्माण कार्य रुकवाए जाने के बावजूद काम जारी रखने और लेंटर डालने का आरोप; अवैध निर्माण की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट करने की मांग।

जालंधर, पंजाब। जालंधर में इमारतों के निर्माण संबंधी नियमों और नगर निगम की कार्रवाई को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। डॉ. रोहित हेल्थ केयर सेंटर के नाम से संचालित प्रतिष्ठान वाली इमारत में दूसरी मंजिल पर किए जा रहे निर्माण को लेकर विवाद सामने आया है। आरोप है कि नगर निगम जालंधर की ओर से निर्माण कार्य बंद करवाया गया था, लेकिन इसके बावजूद भवन मालिक या संबंधित पक्ष ने कथित तौर पर निगम के आदेशों की अनदेखी करते हुए निर्माण कार्य जारी रखा और लेंटर भी डाल दिया।

नगर निगम की कार्रवाई के बावजूद निर्माण जारी रहने का आरोप

मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित इमारत में दूसरी मंजिल पर निर्माण कार्य को लेकर नगर निगम जालंधर की ओर से रोक लगाई गई थी। आरोप है कि निगम की कार्रवाई के बाद भी निर्माण कार्य नहीं रोका गया। अब इस मामले में यह सवाल उठ रहा है कि यदि निर्माण कार्य वास्तव में बंद करवाया गया था, तो उसके बाद काम दोबारा कैसे शुरू हुआ और लेंटर डालने तक की नौबत कैसे आई?

यदि नगर निगम के वैध आदेश लागू होने के बावजूद निर्माण जारी रखा गया है, तो यह मामले की गंभीरता को बढ़ाता है। हालांकि, आदेश की प्रति, निर्माण की स्वीकृत योजना और संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक बयान के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन नियमों का उल्लंघन हुआ है।

तस्वीर में दिखाई दे रही इमारत ने खड़े किए सवाल

सामने आई तस्वीर में डॉ. रोहित हेल्थ केयर सेंटर के बोर्ड वाली इमारत के ऊपरी हिस्से में निर्माण से जुड़े कुछ अधूरे हिस्से और ईंटों का काम दिखाई दे रहा है। इमारत के सामने सड़क पर निर्माण सामग्री भी रखी हुई नजर आ रही है। तस्वीर निर्माण स्थल की स्थिति दिखाती है, लेकिन इससे अपने आप यह प्रमाणित नहीं होता कि निर्माण बिना मंजूरी हुआ है या नगर निगम के आदेश का उल्लंघन किया गया है।

इसलिए संबंधित भवन की स्वीकृत बिल्डिंग योजना, मंजूर मंजिलों की संख्या, निर्माण की अनुमति और नगर निगम द्वारा जारी आदेशों की जांच आवश्यक है।

क्या नगर निगम दोबारा करेगा कार्रवाई?

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि निर्माण रोकने के आदेश जारी किए गए थे, तो उनके पालन की निगरानी किस अधिकारी की जिम्मेदारी थी? क्या मौके पर दोबारा निरीक्षण किया गया? क्या निर्माण जारी रहने पर कोई नोटिस, चालान या अन्य कानूनी कार्रवाई की गई?

नगर निगम जालंधर के संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कर यह स्पष्ट करने की अपेक्षा है कि इमारत का निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुसार हो रहा है या नहीं। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

निष्पक्ष जांच और आधिकारिक जवाब जरूरी

इस मामले में संबंधित भवन मालिक या प्रबंधन का पक्ष तथा नगर निगम जालंधर की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना भी जरूरी है। उपलब्ध दस्तावेजों और मौके की जांच के बिना किसी व्यक्ति या प्रतिष्ठान को दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा।

अब देखना यह होगा कि नगर निगम जालंधर इस मामले में क्या रुख अपनाता है और कथित रूप से रोके गए निर्माण की जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने कब तक स्पष्ट करता है।

News India Now

News India Now is Government Registered Online Web News Portal.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button