जालंधर में अवैध निर्माण पर कौन लगाएगा लगाम?

Building Branch के अधिकारी ड्यूटी से बाहर, शहर में धड़ल्ले से उठ रही अवैध इमारतें
जालंधर। शहर में अवैध और नियमों के विपरीत हो रहे निर्माण को लेकर नगर निगम जालंधर के Building Branch की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह है कि जब शहर में जगह-जगह निर्माण कार्य तेजी से चल रहे हैं, तो उनकी मौके पर निगरानी और नियमों के उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई कौन करेगा?जानकारी के अनुसार नगर निगम जालंधर के Building Department में तैनात कई महत्वपूर्ण अधिकारियों की ड्यूटी इस समय SIR (Special Intensive Revision) से संबंधित कार्यों में लगी हुई है। इसके चलते Building Branch में मैदानी स्तर पर अवैध निर्माण की निगरानी और कार्रवाई के लिए उपलब्ध मानव संसाधन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
अधिकारी मौजूद, फिर भी फील्ड में कमी क्यों?
नगर निगम जालंधर के आधिकारिक प्रशासनिक रिकॉर्ड में Town Planning Wing के अंतर्गत ATP, Assistant Town Planner और Building Inspector सहित कई पद दर्ज हैं।ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यदि नगर निगम के पास अतिरिक्त अधिकारी उपलब्ध हैं, तो उन्हें Building Branch की फील्ड ड्यूटी में लगाकर अवैध निर्माणों की निगरानी क्यों नहीं करवाई जा रही?शहरवासियों का कहना है कि यदि पर्याप्त अधिकारी फील्ड में मौजूद रहें, निर्माणाधीन इमारतों की नियमित जांच हो और शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाए, तो अवैध निर्माण पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है।

नियमों में साफ है Building Branch की जिम्मेदारी
नगर निगम जालंधर के Building Bye-Laws में अनधिकृत निर्माण को लेकर निगरानी और कार्रवाई की व्यवस्था स्पष्ट रूप से दी गई है। नियमों के अनुसार Building Inspector को निर्माण की जांच करनी होती है और यह सुनिश्चित करना होता है कि निर्माण स्वीकृत नक्शे और निर्धारित नियमों के अनुसार हो। वहीं अनधिकृत निर्माण गतिविधियों की पहचान के लिए enforcement staff और Municipal Town Planners द्वारा नियमित निगरानी किए जाने की व्यवस्था भी है।ऐसे में अगर फील्ड में अधिकारियों की कमी के कारण निगरानी प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर शहर की Building Regulation व्यवस्था पर पड़ सकता है।
क्या अवैध निर्माणकर्ताओं को मिल रहा है खुला मैदान?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि Building Branch के अधिकारी पर्याप्त संख्या में मौके पर उपलब्ध नहीं हैं, तो शहर में चल रहे निर्माण कार्यों की जांच कौन करेगा?कई मामलों में निर्माण कुछ ही दिनों में कई मंजिल तक पहुंच जाता है। यदि शुरुआत में ही मौके पर निरीक्षण हो और नियमों का उल्लंघन मिलने पर काम रुकवा दिया जाए, तो बाद में कार्रवाई की जरूरत कम पड़ सकती है।लेकिन यदि निर्माण शुरू होने के बाद लंबे समय तक कोई प्रभावी निगरानी न हो, तो निर्माणकर्ता को यह संदेश जा सकता है कि कार्रवाई का खतरा तत्काल नहीं है।
पहले भी सामने आते रहे हैं अवैध निर्माण के मामले
जालंधर में अवैध निर्माण कोई नया मुद्दा नहीं है। सितंबर 2024 में नगर निगम के Building Branch ने शहर के विभिन्न हिस्सों में 10 अवैध व्यावसायिक ढांचों को सील किया था और Ladhewali Road पर बिना मंजूरी बन रही एक इमारत को गिराया गया था।इससे साफ है कि जब Building Branch सक्रिय होकर फील्ड में कार्रवाई करता है तो अवैध निर्माण के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।
अब सवाल नगर निगम के उच्च अधिकारियों से
ऐसे में नगर निगम जालंधर के उच्च अधिकारियों के सामने कई अहम सवाल खड़े होते हैं— क्या Building Branch में वर्तमान में पर्याप्त फील्ड स्टाफ उपलब्ध है?यदि नहीं, तो अतिरिक्त उपलब्ध अधिकारियों को Building Branch में तैनात क्यों नहीं किया जा रहा?क्या SIR ड्यूटी के कारण शहर में भवन निर्माण की निगरानी प्रभावित हो रही है?शहर में प्रतिदिन होने वाले नए निर्माणों की नियमित जांच कौन कर रहा है?शिकायत मिलने के बाद मौके पर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारी कौन हैं?और सबसे महत्वपूर्ण—अगर नियमों के अनुसार अवैध निर्माण की निगरानी और कार्रवाई Building Branch की जिम्मेदारी है, तो वर्तमान व्यवस्था में इसकी जवाबदेही किसकी तय होगी?
चांदी अवैध निर्माणकर्ताओं की या व्यवस्था की कमजोरी की?
शहर में अवैध निर्माण करने वालों के लिए सबसे बड़ी राहत तब होती है जब उन्हें मौके पर रोकने वाला प्रभावी तंत्र कमजोर पड़ जाए। हालांकि किसी अधिकारी या व्यक्ति पर मिलीभगत अथवा भ्रष्टाचार का आरोप बिना ठोस प्रमाण के लगाना उचित नहीं होगा, लेकिन व्यवस्था में पैदा हुआ कथित खालीपन अपने आप में गंभीर सवाल जरूर खड़ा करता है।नगर निगम के उच्च अधिकारियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि Building Branch में फील्ड स्टाफ की वर्तमान स्थिति क्या है और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।क्योंकि शहर में अगर निर्माण लगातार होता रहा और निगरानी करने वाला तंत्र कमजोर रहा, तो आने वाले समय में सिर्फ नियमों का उल्लंघन ही नहीं, बल्कि शहरी नियोजन, सड़क व्यवस्था, पार्किंग, सुरक्षा और आम नागरिकों की सुविधा से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े हो सकते हैं।अब देखना यह होगा कि नगर निगम जालंधर इस मामले में सिर्फ कागजों पर व्यवस्था बनाए रखता है या वास्तव में Building Branch को पर्याप्त फील्ड स्टाफ देकर शहर में हो रहे कथित अवैध निर्माणों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करता है।



