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मॉडल टाउन जालंधर में ‘लैंड माफिया’ का आतंक: रिहायशी फ्लैट्स बने अवैध शोरूम! DC अग्रवाल के पास पहुंचा मामला, क्या अब होगी सख्त कार्रवाई?

— MCJ अधिकारियों की ‘मिलीभगत’ पर उठे गंभीर सवाल; पहली अपील पर भी मिला था ‘झूठा’ जवाब —

जालंधर: मॉडल टाउन क्षेत्र, जो कभी शहर के शांत रिहायशी इलाकों में गिना जाता था, अब कथित ‘लैंड माफिया’ और प्रॉपर्टी डीलरों के अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों का अड्डा बनता जा रहा है। यहां पीपीआर मॉल के पास स्थित रिहायशी फ्लैट्स को धड़ल्ले से कमर्शियल शोरूम, दुकानों और बाजारों में बदल दिया गया है, जिससे न केवल बिल्डिंग बायलॉज (भवन उपनियमों) का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि अन्य निवासियों के जीवन को भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए, ग्लोबल ह्यूमन राइट्स वेलफेयर सोसाइटी (रजिस्टर्ड) ट्रस्ट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने इस पूरे गोरखधंधे को उजागर करते हुए नगर निगम जालंधर (MCJ) के समक्ष एक शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, नगर निगम के अधिकारियों के ढुलमुल रवैये के कारण यह मामला अब उपायुक्त (DC) हिमांशु अग्रवाल के समक्ष लंबित दूसरी अपील के रूप में पहुँच चुका है।

🔴 ग्राउंड फ्लोर पर ‘अवैध बाज़ार’ और अधिकारियों की ‘पल्ला झाड़’ नीति

शिकायतकर्ता के अनुसार, ऋषि नगर क्षेत्र के ये फ्लैट्स मास्टर प्लान के तहत विशुद्ध रूप से रिहायशी परिसर हैं, जहाँ किसी भी व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद, भू-माफियाओं ने ग्राउंड फ्लोर के फ्लैट्स को बिना किसी सरकारी अनुमति के व्यावसायिक दुकानों में बदल दिया है।

यह मामला तब और गंभीर हो गया जब मूल शिकायत (दिनांक 18 अक्टूबर 2024) के जवाब में MCJ के अधिकारी ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि “साइट का बिल्डिंग कंट्रोल MCJ के MTP ब्रांच के तहत नहीं, बल्कि JDA के तहत है।”

💔 पहली अपील: ‘पुरानी व्यावसायिक संपत्ति’ बताकर मामला बंद करने की कोशिश

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शिकायतकर्ता ने इस जवाब को चुनौती देते हुए पहली अपील दायर की, जिसमें साफ तौर पर कहा गया कि संपत्ति नगर निगम की सीमा के भीतर आती है। इस अपील पर, बिल्डिंग इंस्पेक्टर गौरव ठाकुर और एटीपी विकास दुआ ने एक चौंकाने वाली रिपोर्ट दी। उन्होंने कहा: “साइट की जाँच की गई। यह एक पुरानी स्थापित व्यावसायिक संपत्ति है। साइट पर कोई नया निर्माण नहीं हो रहा है।”

शिकायतकर्ता ने इस जवाब को “झूठा” और “आधारहीन” बताते हुए दावा किया कि यह अधिकारियों की तरफ से कार्रवाई से बचने की मंशा से दिया गया है, क्योंकि संलग्न तस्वीरों में स्पष्ट रूप से रिहायशी फ्लैट्स का व्यावसायिक इस्तेमाल दिख रहा है।

🔨 दूसरी अपील: अब DC अग्रवाल के एक्शन का इंतज़ार

पहली अपील के जवाब से पूरी तरह असंतुष्ट होने के बाद, शिकायतकर्ता ने अब सीधे DC हिमांशु अग्रवाल के समक्ष दूसरी अपील दायर की है। अपील में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इंस्पेक्टर गौरव ठाकुर का दावा ‘तथ्यों के विपरीत’ है और नगर निगम के क्षेत्राधिकार में आने के बावजूद उचित कार्रवाई नहीं की गई।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस अवैध व्यावसायिक रूपांतरण और निर्माण के कारण, ऊपरी मंजिलों के रिहायशी फ्लैटों में दरारें आ गई हैं, जिससे निवासियों के जीवन को बड़ा खतरा पैदा हो गया है। यह स्पष्ट रूप से बिल्डिंग बायलॉज और निवासियों की सुरक्षा दोनों को ताक पर रखने का मामला है।

❓ सवाल: क्या MCJ अधिकारी कर रहे हैं लैंड माफिया का समर्थन?

यह पूरा घटनाक्रम नगर निगम जालंधर के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है:

  1. क्या MCJ के अधिकारी जानबूझकर क्षेत्राधिकार का गलत बहाना बनाकर अवैध गतिविधियों को संरक्षण दे रहे हैं?
  2. पहली अपील पर ‘पुरानी व्यावसायिक संपत्ति’ का झूठा जवाब क्यों दिया गया, जबकि तस्वीरें रिहायशी फ्लैट्स के अवैध रूपांतरण की गवाही दे रही हैं?
  3. निवासियों के जीवन को खतरे में डालने वाले इस अवैध निर्माण और व्यावसायिक उपयोग को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई कब होगी?

शिकायतकर्ता ने DC हिमांशु अग्रवाल से अनुरोध किया है कि दूसरी अपील पर तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाए, रिहायशी फ्लैट्स का व्यावसायिक उपयोग तुरंत बंद किया जाए, और कार्रवाई पूरी होने तक अपील को बंद न किया जाए।

शहर की निगाहें अब DC अग्रवाल पर टिकी हैं कि क्या वे इस “लैंड माफिया” के आतंक पर लगाम लगाकर नगर निगम के अधिकारियों की जवाबदेही तय करेंगे और कानून का राज स्थापित करेंगे।

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