किशनपुरा रोड पर रिहायशी मकान को दुकानों में बदलने का आरोप, निगम से तत्काल कार्रवाई की मांग

“रिहायशी मकान में चल रहा कथित कमर्शियल निर्माण, साइट प्लान/NOC की मंजूरी पर उठे सवाल—नगर निगम की कार्रवाई का इंतजार”
🚨 किशनपुरा रोड पर रिहायशी मकान को दुकानों में बदलने का आरोप, निगम से तत्काल कार्रवाई की मांग
जालंधर: शहर के किशनपुरा रोड पर श्री हनुमान मंदिर के सामने और आशीर्वाद सेल्स के साथ लगते एक मकान में कथित तौर पर रिहायशी परिसर को व्यावसायिक दुकानों में तब्दील करने का काम किए जाने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, मौके पर निर्माण/तोड़फोड़ का कार्य किया जा रहा है और आरोप है कि इसके लिए नगर निगम से आवश्यक साइट प्लान/बिल्डिंग प्लान की मंजूरी तथा संबंधित NOC और अन्य अनिवार्य अनुमतियां प्राप्त नहीं की गई हैं।
शिकायत में नगर निगम जालंधर से मांग की गई है कि मामले की तत्काल मौके पर जांच करवाकर यह स्पष्ट किया जाए कि उक्त संपत्ति के लिए कोई स्वीकृत बिल्डिंग प्लान, कमर्शियल उपयोग की अनुमति, चेंज ऑफ लैंड यूज अथवा अन्य आवश्यक वैधानिक मंजूरियां ली गई हैं या नहीं।
⚠️ रिहायशी से कमर्शियल उपयोग पर उठे सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि संपत्ति मूल रूप से रिहायशी उपयोग के लिए स्वीकृत है, तो क्या उसे आवश्यक वैधानिक अनुमति के बिना दुकानों/व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बदला जा सकता है? साथ ही यह भी जांच का विषय है कि प्रस्तावित निर्माण सेटबैक, FAR/कवरेज, पार्किंग, सड़क की चौड़ाई, संरचनात्मक सुरक्षा और अन्य लागू Building Bye-Laws का पालन करता है या नहीं।
शिकायतकर्ता ने Punjab Municipal Corporation Act, 1976 तथा Jalandhar Municipal Corporation Building Bye-Laws के तहत कार्रवाई की मांग की है। यदि निगम की जांच में निर्माण वास्तव में अनधिकृत या स्वीकृत नक्शे के विपरीत पाया जाता है, तो नियमानुसार Stop-Work Notice तथा अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
🛑 “पहले जांच, फिर निर्माण” की मांग


शिकायतकर्ता का कहना है कि जब तक संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर निर्माण की वैधता और दस्तावेजों की जांच नहीं कर लेते, तब तक मौके पर चल रहे निर्माण कार्य को तत्काल रुकवाया जाना चाहिए, ताकि बाद में किसी प्रकार की अपरिवर्तनीय स्थिति पैदा न हो।
अब निगाहें नगर निगम जालंधर के Building Branch/Town Planning अधिकारियों पर हैं कि शिकायत पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और मौके की जांच के बाद निगम का आधिकारिक रुख क्या सामने आता है।
महत्वपूर्ण: इस मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है। संबंधित संपत्ति मालिक/निर्माणकर्ता का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।



