नवरात्रों में शराब व मीट की दुकानें बंद रखने या ढकने की मांग, शिवसेना (बालासाहेब ठाकरे) ने डीसी को सौंपा ज्ञापन

नवरात्रों में शराब व मीट की दुकानें बंद रखने या ढकने की मांग, शिवसेना (बालासाहेब ठाकरे) ने डीसी को सौंपा ज्ञापन।
जालंधर/पंजाब(राजीव धामी): शारदीय नवरात्रों के पावन पर्व के मद्देनजर शिवसेना (बालासाहेब ठाकरे) ने जिला प्रशासन से शराब और मांस (मीट) की दुकानों को बंद रखने या उन्हें पूर्ण रूप से ढकने की मांग की है। इस संबंध में पार्टी के कार्यकारी प्रधान श्री रोहित जोशी एवं जिला प्रमुख श्री दिनेश चौहान की अगुवाई में माननीय उपायुक्त (डी.सी.) को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा गया। शिवसेना नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस पर उचित कार्रवाई नहीं की, तो पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन के लिए मजबूर होगी।
सौपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि आगामी 11 अक्टूबर 2026 से 20 अक्टूबर 2026 तक देश भर में शारदीय नवरात्रों का पवित्र त्योहार श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा। इन नौ दिनों में माता रानी के लाखों भक्त व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और मंदिरों में दर्शन के लिए मुख्य मार्गों व बाजारों से गुजरते हैं।धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने का हवालाशिवसेना नेताओं, रोहित जोशी और दिनेश चौहान ने कहा कि ऐसे पवित्र अवसर पर मुख्य बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर स्थित शराब व मीट की दुकानों के खुले रहने और उनके विज्ञापनों के प्रदर्शन से सनातन धर्म में आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होती हैं।
उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि इन नौ दिनों के दौरान जिले की सभी शराब और मांस की दुकानों को पूरी तरह से बंद रखने के आदेश जारी किए जाएं।दुकानों को कवर करने का विकल्पज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किन्हीं प्रशासनिक या कानूनी कारणों से इन दुकानों को पूरी तरह बंद करना संभव नहीं है, तो प्रशासन दुकानदारों को अपने बोर्ड, होर्डिंग, विज्ञापन और प्रदर्शित सामग्री को पूरी तरह से ढकने (कवर करने) के सख्त निर्देश जारी करे।
इससे रास्ते से गुजरने वाले श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस नहीं पहुंचेगी और जिले में धार्मिक पवित्रता का माहौल बना रहेगा।कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनीशिवसेना (बालासाहेब ठाकरे) ने प्रशासन से जनभावनाओं का सम्मान करते हुए शीघ्र और सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया है। पार्टी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि जिला प्रशासन इस संवेदनशील विषय पर निष्क्रिय रहता है या कोई प्रभावी कदम नहीं उठाता, तो शिवसेना जन-असंतोष को देखते हुए कानून के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।



