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26 मई को विरोध प्रदर्शन से पहले किसान संगठनों में मतभेद, पीएम को लिखे पत्र पर उठा सवाल

31 किसान संगठनों ने इस बात पर आपत्ति जताई है कि पीएम को जो लेटर लिखा गया है, उस पर संयुक्त मोर्चा की सहमति नहीं थी. फाइल फोटो

31 किसान संगठनों ने इस बात पर आपत्ति जताई है कि पीएम को जो लेटर लिखा गया है, उस पर संयुक्त मोर्चा की सहमति नहीं थी. फाइल फोटो

Difference in Farmers Organisation over letter to PM: 11 मई को किसान मोर्चे के 9 सदस्यों के संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वधान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेटर लिखकर बातचीत शुरू करने की अपील की थी.

नई दिल्ली. तीन किसान कानून को लेकर आंदोलन कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा के बीच ही मतभेद हो गया है. दरअसल कुछ दिन पहले ही संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखकर बातचीत की पेशकश की थी. लेकिन, संयुक्त किसान मोर्चा के बीच मतभेद तब सामने आ गया जब किसान मोर्चा के तकरीबन 31 किसान संगठनों ने इस बात पर आपत्ति जता दी कि पीएम को जो लेटर लिखा गया है, उसपर संयुक्त मोर्चा की सहमति नहीं थी और केवल 9 संगठनों की सहमति से पीएम को लेटर लिखा गया. आपको बता दें कि संयुक्त मोर्चा के बैनर तले 40 किसान संगठन है, जो केंद्र के तीन कृषि कानून को लेकर देशभर में आंदोलन चला रहे हैं. कई किसान संगठनों ने संयुक्त मोर्चा को लेटर लिखकर इस बात पर आपत्ति जताई कि 11 किसान संगठन जो वामपंथी विचारों के है, वे बातचीत और फैसले को लेकर मनमानी कर रहे हैं. किसान संगठनों को जो लेटर लिखा गया, उस पर साफ था कि योगेंद्र यादव और डॉक्टर दर्शनपाल अपनी मनमानी कर रहे हैं. 11 मई को किसान मोर्चे के 9 सदस्यों के संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वधान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेटर लिखकर बातचीत शुरू करने की अपील की थी. लेकिन, ज्यादातर किसान संगठनों ने बातचीत की इस पेशकश को गलत बता दिया है. सूत्रों की माने तो आगे ये विवाद और गहरा सकता है. संयुक्त किसान मोर्चा ने 9 संगठनों की तरफ से पीएम को लिखे पत्र पर आपत्ति जताते हुए सभी संगठनों को लेटर लिखा है और 9 सदस्यों की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं. लेटर में लिखा गया कि कृषि कानून के खिलाफ जो आंदोलन चलाया जा रहा है, उसमें 40 सदस्यीय समिति की मान्यता से ही फैसला लिया जाता है, लेकिन जिस तरीके से 9 सदस्यों ने एकतरफा और बिना सहमति के फैसले लिए है, ये ठीक नहीं है. पत्र में कहा गया है कि अब तक सहमति के आधार पर केंद्र सरकार के साथ 11 बैठकें की गई.अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) की पंजाब इकाई ने हाल के घटनाक्रम को देखते हुए डॉ दर्शन पाल और योगेंद्र यादव को अपना नेता मानने से इनकार कर दिया है. पत्र में 32 किसान संगठनों की जल्द से जल्द बैठक बुलाने की मांग रखी गयी है. 26 मई को किसान आंदोलन के 6 महीने पूरे होने पर किसान संगठनों ने विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है, जिसे विपक्ष की 12 पार्टियों ने समर्थन दिया है.





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