नगर निगम बिल्डिंग विभाग की नई कार्यप्रणाली पर सवाल: इंस्पेक्टर की जगह अब ड्राफ्ट्समैन को भेजी जा रहीं अवैध निर्माण की शिकायते।

शिकायत निवारण प्रक्रिया में इस अजीब बदलाव से अवैध निर्माणों पर कार्रवाई में हो रही देरी, शिकायतकर्ता और विभाग के कर्मचारी भी परेशान।
जालंधर: जालंधर नगर निगम का बिल्डिंग विभाग एक बार फिर अपनी कार्यप्रणाली को लेकर सवालों के घेरे में है। अवैध निर्माणों पर नकेल कसने में अक्सर नाकाम रहने वाले विभाग के उच्च अधिकारियों ने अब शिकायतों के निपटारे के लिए एक ऐसी प्रक्रिया अपना ली है, जिससे समस्या सुलझने की बजाय और ज्यादा उलझ गई है।
जानकारी के अनुसार, पहले पंजाब सरकार के पीजीआरएस (PGRS) पोर्टल पर दर्ज होने वाली अवैध निर्माण से संबंधित शिकायतें सीधे संबंधित इलाके के बिल्डिंग इंस्पेक्टर को कार्रवाई के लिए भेजी जाती थीं। लेकिन पिछले लगभग एक महीने से, बिना किसी आधिकारिक सूचना या नोटिफिकेशन के, इन शिकायतों को बिल्डिंग इंस्पेक्टर के बजाय ड्राफ्ट्समैन को भेजा जा रहा है। विभाग के इस अजीब फैसले से न केवल कार्रवाई में देरी हो रही है, बल्कि निगम की मंशा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

इस बदलाव का सीधा असर शहर में हो रहे अवैध निर्माणों पर कार्रवाई में हो रही देरी के रूप में दिख रहा है। जिस काम को फील्ड में जाकर बिल्डिंग इंस्पेक्टर को अंजाम देना है, वह अब फाइलों में ड्राफ्ट्समैन के पास अटक कर रह गया है। इससे न केवल विभाग का कीमती समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि शिकायतकर्ताओं को भी समय पर कोई राहत या जवाब नहीं मिल पा रहा है। सूत्रों की मानें तो विभाग के भीतर भी इस नए नियम को लेकर भारी असंतोष है। कई कर्मचारियों का मानना है कि जो कार्य और अधिकार क्षेत्र बिल्डिंग इंस्पेक्टर का है, उसे ड्राफ्ट्समैन से नहीं करवाया जा सकता। यह प्रक्रिया के विरुद्ध है और इससे विभाग की कार्यक्षमता पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है।

एक तरफ शहर में अवैध निर्माणों की बाढ़ आई हुई है और दूसरी ओर बिल्डिंग विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा अपनाया गया यह नया तरीका उनकी कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। जागरूक नागरिकों का कहना है कि यह कदम कहीं न कहीं अवैध निर्माण करने वालों को संरक्षण देने और शिकायतकर्ताओं को प्रक्रिया में उलझाकर हतोत्साहित करने का एक तरीका लगता है। अब देखना यह होगा कि क्या इस मामले के सामने आने के बाद निगम के उच्च अधिकारी इस पर संज्ञान लेकर पुरानी व्यवस्था को बहाल करते हैं या शहर यूं ही अवैध निर्माणों की भेंट चढ़ता रहेगा।




