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यूपी में शादी से पहले एक दूल्‍हे ने ल‍िखी फेसबुक पोस्‍ट, लोग कर रहे हैं उसका सपोर्ट, जानें क्‍या है मांग?

उत्‍तर प्रदेश के बुंदेलखंड में महोबा जिले के एक गांव में दलित दूल्हों को घोड़ी में चढ़ कर बरात निकलना चाहता है

उत्‍तर प्रदेश के बुंदेलखंड में महोबा जिले के एक गांव में दलित दूल्हों को घोड़ी में चढ़ कर बरात निकलना चाहता है

Uttar Pradesh News: 22 साल का दूल्‍हा अलखराम अपनी मां और परिजनों से लिपट, लिपटकर फूट, फूटकर रो रहा है, जिसकी शादी 18 जून को है और यह घोड़ी में चढ़कर अपनी बरात ले जाने का सपना बचपन से संजोय हुए है पर इसके गांव में दबंग, सामंतवादी लोग दलितों को घोड़ी में सवार हो कर बारात निकालने की इजाजत नहीं देते है.

उत्‍तर प्रदेश के बुंदेलखंड में महोबा जिले के एक गांव में दलित दूल्हों को घोड़ी में चढ़ कर बरात निकलने की इजाजत नहीं है. इसी से परेशान एक दलित दूल्हा जिसकी बारात 18 जून को जानी है उसने सोशल मीडिया में पोस्ट डाल कर लोगों से मदद मांगते हुए लिखा है कि मेरी शादी 18 जून को है और मैं घोड़े में सवार हो कर अपनी बरात ले जाना चाहता हूं. क्या कोई मेरी मदद कर सकता है? दूल्हे की इस पोस्ट से हड़कम्प मच गया है और लोग पूछ रहे है कि आजाद भारत मे दलित दूल्हे को घोड़ी में चढ़कर बारात निकालने की अनुमति क्यों नहीं?

22 साल का दूल्‍हा अलखराम अपनी मां और परिजनों से लिपट, लिपटकर फूट, फूटकर रो रहा है, जिसकी शादी 18 जून को है और यह घोड़ी में चढ़कर अपनी बरात ले जाने का सपना बचपन से संजोय हुए है पर इसके गांव में दबंग, सामंतवादी लोग दलितों को घोड़ी में सवार हो कर बारात निकालने की इजाजत नहीं देते है. इसके चलते अलखराम की घोड़ी में चढ़कर बरात निकालने के अरमान पूरे होते नही दिखाई दे रहे है. पिता ने महोबकंठ थाने में प्रार्थना पत्र भी दिया है. अलखराम उसके परिवार से ही सुनिए उसकी बेबसी की कहानी…

महोबा जिले में महोबकंठ थाने का एक गांव है ‘माधवगंज’ 2000 की आबादी वाले इस गांव में आजादी के 74 सालों बाद भी आजतक किसी दलित दूल्हे की बरात घोड़ी में सवार हो कर नही निकल सकी है. किसी दलित की क्या मजाल की वो दूल्हा बन कर घोड़े में चढ़कर अपनी बारात निकालने की हिमाकत कर सके? इस गांव के सामंतशाही विचारधारा के लोग किसी भी दलित दूल्हे को घोड़े में चढ़कर बरात निकलने की इजाजत नहीं देते है. इस गांव के बुजुर्ग ग्रामीण बताते है कि उनकी और उनके जैसे किसी की बरात घोड़ी में सवार हो कर नहीं निकल सकी है.

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दूल्‍हे की फेसबुक पोस्‍ट

यूपी के बुन्देलखण्ड में सामंतवाद की जड़े इतनी गहरी है कि इस इलाके के एक गांव में आजादी के बाद से ही किसी दलित दूल्हे की बरात घोड़े पर चढ़ कर निकलना तो दूर की बात है. कार, बाइक पर भी बैठ कर दूल्हा गांव से नही निकल सका है. सामंतशाही की इतनी गहरी जड़े होने के बाद भी शासन, प्रशासन की निगाह इस गांव के सामन्तों तक नही पहुंची है. अब अलख राम के द्वारा सोशल मीडिया में गुहार लगाने के बाद भी जिला प्रशासन तो नहीं जागा पर भीम आर्मी जरूर जाग गई है. भीम आर्मी ने अपनी दम पर अलखराम की बरात घोड़ी में चढ़वा कर निकलवाने की तैयारी शुरू कर दी है. तो वहीं चरखारी के बीजेपी विधायक ब्रजभूषण राजपूत ने भी दलित युवक से फोन पर बात चीत कर उसकी शादी में कोई व्यवधान न होने का आश्वासन दिया विधायक से बातचीत का ऑडियो भी वायरल हो रहा है.





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