कौन हैं अलपन बंदोपाध्याय जिनके लिए केंद्र से सीधा आमना-सामना कर रहीं ममता


अलपन बंदोपाध्याय. (तस्वीर-मनीकंट्रोल)
ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने अलपन (Alapan Bandyopadhyay) को अपना मुख्य सलाहकार बनाकर सीधे तौर पर केंद्र को चुनौती देने जैसा कदम उठाया है. आखिर अलपन बंदोपाध्याय में ऐसा क्या जिसकी वजह से ये विवाद इतना बढ़ गया है?
नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव रहे और अब ममता बनर्जी के मुख्य सलाहकार बन चुके अलपन बंदोपाध्याय (Alapan Bandyopadhyay) इस वक्त मीडिया की सुर्खियों में हैं. कार्यकाल पूरा होने पर केंद्र द्वारा अलपन बंदोपाध्याय को दिल्ली बुलाए जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बढ़ता जा रहा है. ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने उन्हें अपना मुख्य सलाहकार बनाकर सीधे तौर पर केंद्र को चुनौती देने जैसा कदम उठाया है. आखिर अलपन बंदोपाध्याय में ऐसा क्या जिसकी वजह से ये विवाद इतना बढ़ गया है?
दरअसल केंद्र ने बंदोपाध्याय को दिल्ली बुलाने का आदेश चक्रवाती यास तूफान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बैठक को मुख्यमंत्री द्वारा महज 15 मिनट में निपटाने से उत्पन्न विवाद के कुछ घंटों के बाद दिया था. अलपन बंदोपाध्याय इस बैठक में देर से पहुंचे थे. उन पर केंद्र की नाराजगी की प्रमुख वजह इसे भी माना जा रहा है.
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2015 में अंतरिम राज्य चुनाव आयुक्त भी रह चुके हैं अलपनदरअसल 1987 बैच के आईएएस अफसर अलपन बंदोपाध्याय को राज्य में बेहद लंबे समय तक काम करने का अनुभव हासिल है. सिविल सर्वेंट बनने के बाद वो हावड़ा, उत्तर और दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों के डीएम रह चुके हैं. इसके अलावा कोलकाता मुनिसिपल कमिश्नर के पद पर भी रह चुके हैं. साथ ही वो कई मंत्रालयों के प्रिंसिपल सेक्रेटरी के तौर पर काम कर चुके हैं. इनमें ट्रांसपोर्ट, एमएसएमई, कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, संस्कृति और गृह मंत्रालय शामिल हैं. वो 2015 में अंतरिम राज्य चुनाव आयुक्त भी रह चुके हैं.
लंबे समय तक पश्चिम बंगाल में ग्राउंड पर काम करने का अनुभव
अलपन ने ग्रेजुएशन की पढ़ाई प्रेसिडेंसी कॉलेज से की है. उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन किया. पश्चिम बंगाल के संभ्रांत साहित्य वर्ग में उनके अच्छे खासे संबंध हैं. कहा जाता है कि बेहद लंबे समय तक ग्राउंड और फिर मंत्रालयों में प्रमुख जिम्मेदारियां संभालने की वजह से अलपन के पास पश्चिम बंगाल की बेहतरीन समझ है. और शायद यही वजह है कि वो लंबे समय से ममता सरकार में प्रमुख पदों पर बने हुए हैं.
कलकत्ता विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर हैं अलपन की पत्नी सोनाली
अलपन की पत्नी सोनाली चक्रवर्ती बनर्जी भी इस वक्त बेहद महत्वपूर्ण पद पर हैं. वो कलकत्ता विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर हैं. सोनाली चक्रवर्ती भी राजनीति शास्त्र की प्रोफेसर हैं. सोनाली ख्यातिप्राप्त बांग्ला कवि निरेंद्रनाथ चक्रवर्ती की बेटी हैं. निरेंद्रनाथ को उनकी कृति उलंगा राजा के लिए 1974 में साहित्य अकादमी के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.