
शिकायत पर शिकायत, जवाब पर जवाब… लेकिन कार्रवाई अब तक गायब! गुरु रविदास नगर में अवैध कमर्शियल गतिविधियों को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
जालंधर: श्री गुरु रविदास चौक के पास, घई हॉस्पिटल के सामने स्थित “यम्मी रेस्टोरेंट” अब केवल एक रेस्टोरेंट नहीं, बल्कि नगर निगम की कार्यप्रणाली और कथित अवैध निर्माणों पर हो रही ढिलाई का बड़ा सवाल बनता जा रहा है।
स्थानीय लोगों द्वारा कई बार शिकायतें देने और शिकायत को दोबारा री-ओपन करने के बावजूद अब तक मौके पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। हर बार नगर निगम की ओर से लगभग एक जैसा जवाब दिया जा रहा है—“मालिक को दस्तावेज़ पेश करने को कहा गया है, आगे कार्रवाई की जाएगी।”

लेकिन इलाके के लोगों का सवाल है कि:
❓अगर सब कुछ वैध है तो दस्तावेज़ तुरंत सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे?
❓और अगर निर्माण में गड़बड़ी है, तो कार्रवाई में इतनी देरी क्यों?
❓क्या किसी प्रभावशाली संरक्षण के चलते मामला केवल कागज़ों तक सीमित रखा जा रहा है?
सूत्रों के अनुसार, यह रेस्टोरेंट एक रिहायशी क्षेत्र गुरु रविदास नगर में संचालित हो रहा है, जहां बड़े स्तर की कमर्शियल गतिविधियों के लिए CLU, स्वीकृत बिल्डिंग प्लान, पार्किंग व्यवस्था, ट्रेड लाइसेंस और फायर सेफ्टी जैसी मंजूरियां अनिवार्य मानी जाती हैं।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यहां रोजाना भारी ट्रैफिक जाम, अवैध पार्किंग, शोर-शराबा और सार्वजनिक असुविधा बढ़ती जा रही है, लेकिन इसके बावजूद नगर निगम की कार्रवाई केवल “नोटिस” और “दस्तावेज़ मांगने” तक सीमित दिखाई दे रही है।
सबसे बड़ा सवाल अब रेस्टोरेंट मालिक की भूमिका को लेकर भी उठ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल अब रेस्टोरेंट मालिक की भूमिका को लेकर भी उठ रहा है।
🔥 क्या मालिक के पास सभी वैध मंजूरियां मौजूद हैं?
🔥 अगर हां, तो उन्हें अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
🔥 और अगर नहीं, तो अवैध कमर्शियल गतिविधि अब तक जारी कैसे है?
शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि इस मामले में भी केवल फाइलों का खेल चलता रहा, तो इससे शहरभर में अवैध निर्माण करने वालों का मनोबल बढ़ेगा।
अब लोगों की मांग है कि:
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो
साइट निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
नियम उल्लंघन पाए जाने पर तुरंत सीलिंग/डिमोलिशन कार्रवाई हो
और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए
📢 जनता पूछ रही है
“क्या नगर निगम वास्तव में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करेगा… या फिर यह मामला भी सिर्फ कागज़ों में ही दब जाएगा?”



