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स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा जालंधर नगर निगम का बिल्डिंग विभाग, अवैध निर्माणों पर कार्रवाई हो रही प्रभावित

जालंधर: जालंधर नगर निगम का बिल्डिंग विभाग इन दिनों स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि पूरे शहर में भवन निर्माण नियमों की निगरानी और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त संख्या में बिल्डिंग इंस्पेक्टर उपलब्ध नहीं हैं। इसका सीधा असर विभाग की कार्यप्रणाली पर पड़ रहा है और शहर में अवैध इमारतों तथा अवैध कॉलोनियों का निर्माण तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है।

जानकारी के अनुसार, जालंधर जैसे बड़े शहर की जिम्मेदारी फिलहाल केवल दो बिल्डिंग इंस्पेक्टरों के कंधों पर टिकी हुई है। वहीं, स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए कुछ ड्राफ्ट्समैनों को अतिरिक्त प्रभार (Additional Charge) देकर बिल्डिंग इंस्पेक्टर का कार्य करवाया जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल अस्थायी व्यवस्था है और इससे समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

यदि आसपास के क्षेत्रों से तुलना की जाए तो स्थिति और भी चिंताजनक नजर आती है। उदाहरण के तौर पर फगवाड़ा में लगभग पांच बिल्डिंग इंस्पेक्टर तैनात हैं, जबकि उससे कहीं बड़े और अधिक निर्माण गतिविधियों वाले जालंधर शहर में महज दो इंस्पेक्टर पूरे शहर का भार संभाल रहे हैं। ऐसे में रोजाना मिलने वाली अवैध निर्माणों की शिकायतों की जांच, मौके पर निरीक्षण और नियमों के अनुसार कार्रवाई करना विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

सूत्रों के अनुसार, बिल्डिंग विभाग के पास अवैध निर्माणों से संबंधित शिकायतों का लगातार अंबार बढ़ता जा रहा है। सीमित स्टाफ होने के कारण शिकायतों का समय पर निपटारा नहीं हो पा रहा, जिससे अवैध निर्माण करने वालों के हौसले भी बुलंद हो रहे हैं। शहर के कई इलाकों में बिना अनुमति के निर्माण और अवैध कॉलोनियों के विकसित होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते बिल्डिंग विभाग में आवश्यक संख्या में बिल्डिंग इंस्पेक्टरों की नियुक्ति नहीं की गई तो न केवल शहर में अवैध निर्माणों पर रोक लगाना मुश्किल होगा, बल्कि नगर निगम को मिलने वाले नक्शा फीस, कंपाउंडिंग फीस और अन्य विकास शुल्क जैसे राजस्व पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे निगम के राजस्व को भारी नुकसान होने की आशंका बनी हुई है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पंजाब सरकार और स्थानीय निकाय विभाग (Local Bodies Department) इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान देंगे और जालंधर नगर निगम को आवश्यकता के अनुरूप बिल्डिंग इंस्पेक्टर उपलब्ध कराएंगे? या फिर नगर निगम का बिल्डिंग विभाग भविष्य में भी ड्राफ्ट्समैनों के अतिरिक्त प्रभार और सीमित स्टाफ के सहारे ही चलता रहेगा?


आने वाले समय में सरकार और संबंधित विभाग इस दिशा में क्या कदम उठाते हैं, इस पर शहरवासियों और निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों की नजरें टिकी रहेंगी।

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