गुरु राम दास एन्क्लेव में कथित अवैध निर्माण का खेल! नहर किनारे 4-5 दुकानों का निर्माण, निगम की कार्रवाई पर उठे सवाल

रिहायशी प्लॉट पर बिना मंजूरी दुकानों के निर्माण का आरोप, आसपास के लोगों ने भवन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल
गुरु राम दास एन्क्लेव में कथित अवैध निर्माण का खेल! नहर किनारे 4-5 दुकानों का निर्माण, निगम की कार्रवाई पर उठे सवाल
रिहायशी प्लॉट पर बिना मंजूरी दुकानों के निर्माण का आरोप, आसपास के लोगों ने भवन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

जालंधर: शहर में अवैध निर्माणों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इसी बीच शेर सिंह कॉलोनी के पास गुरु राम दास एन्क्लेव में नहर के नजदीक कथित तौर पर 4 से 5 दुकानों का निर्माण किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार, यह निर्माण एक रिहायशी कॉलोनी के प्लॉट पर किया जा रहा है और इसके लिए संबंधित विभाग से आवश्यक मंजूरी लिए जाने को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का दावा है कि जिस स्थान पर निर्माण चल रहा है, वहां कथित तौर पर रिहायशी उपयोग के लिए निर्धारित प्लॉट पर व्यावसायिक निर्माण खड़ा किया जा रहा है। यदि निर्माण के लिए नगर निगम से आवश्यक नक्शा, बिल्डिंग परमिशन या अन्य वैधानिक स्वीकृतियां नहीं ली गई हैं, तो यह जांच का गंभीर विषय बन जाता है।

निर्माण जारी, कार्रवाई कहां?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि संबंधित विभाग के अधिकारियों के संज्ञान में यह निर्माण है, तो अब तक मौके पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई? आसपास के लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य काफी समय से चल रहा है और इसके बावजूद संबंधित विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही।
सूत्रों के अनुसार, नगर निगम के भवन विभाग की कथित निष्क्रियता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि अवैध निर्माण को किसी न किसी स्तर पर संरक्षण मिल रहा हो सकता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
क्या निगम अधिकारियों की जानकारी में हो रहा निर्माण?
स्थानीय लोगों और सूत्रों द्वारा सबसे गंभीर सवाल यह उठाया जा रहा है कि अगर निर्माण वास्तव में बिना अनुमति हो रहा है, तो क्या इसकी जानकारी नगर निगम के संबंधित अधिकारियों को नहीं है? अगर जानकारी है, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई और अगर जानकारी नहीं है, तो भवन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि रिहायशी प्लॉट पर व्यावसायिक दुकानों के निर्माण की अनुमति किस आधार पर दी गई, क्या कोई नक्शा पास हुआ है और क्या मौके पर स्वीकृत नक्शे के अनुरूप ही निर्माण हो रहा है।
सरकारी राजस्व को भी नुकसान का सवाल
यदि रिहायशी जमीन का इस्तेमाल व्यावसायिक निर्माण के लिए किया जा रहा है और इसके लिए निर्धारित सरकारी शुल्क, टैक्स, फीस अथवा अन्य वैधानिक देनदारियां जमा नहीं की गई हैं, तो इससे सरकारी राजस्व को संभावित नुकसान का मुद्दा भी सामने आता है। इस पहलू की जांच संबंधित विभाग द्वारा रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
अब निगम प्रशासन की परीक्षा
गुरु राम दास एन्क्लेव में सामने आए इस कथित निर्माण ने नगर निगम जालंधर के भवन विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि नगर निगम जालंधर मौके पर निर्माण की वैधता की जांच करता है या नहीं, संबंधित रिकॉर्ड और मंजूरियों की जांच होती है या नहीं और यदि निर्माण नियमों के विपरीत पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होती है या नहीं।
फिलहाल सवाल कई हैं, लेकिन जवाब का इंतजार है। क्या नगर निगम की कार्रवाई जमीन पर नजर आएगी या यह मामला भी शिकायतों और आरोपों के बीच दबकर रह जाएगा—यह आने वाला समय बताएगा।



