सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ी, गैर-कानूनी कंटेंट 36 घंटे में हटाना होगा।

डीपफेक और ऑनलाइन फ्रॉड पर लगेगी लगाम, सरकार ने लागू किए नए IT नियम, 15 नवंबर से होंगे प्रभावी।
AI-जनित सामग्री पर देना होगा डिस्क्लेमर

नई दिल्ली। डिजिटल दुनिया को सुरक्षित बनाने और डीपफेक जैसी तकनीकों के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियम, 2021 में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। “सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम, 2025” के नाम से जाने जाने वाले ये नए नियम 15 नवंबर, 2025 से पूरे देश में लागू हो जाएंगे।

इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स, विशेषकर फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया मध्यस्थों की जवाबदेही तय करना है। सरकार का मानना है कि ये बदलाव इंटरनेट को यूजर्स के लिए एक खुला, सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह माहौल प्रदान करेंगे ।
क्या हैं नए नियमों के प्रमुख प्रावधान?
नए नियमों के तहत अब सोशल मीडिया कंपनियों को पहले से कहीं ज्यादा सतर्क और जिम्मेदार रहना होगा। प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं:
36 घंटे की डेडलाइन: किसी भी अदालत या सरकारी एजेंसी द्वारा गैर-कानूनी ठहराई गई सामग्री को अब प्लेटफॉर्म्स को 36 घंटे के भीतर हटाना या उस तक पहुंच को अक्षम करना अनिवार्य होगा । इसमें ऐसा कोई भी कंटेंट शामिल है जो भारत की संप्रभुता, सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या नैतिकता के खिलाफ हो।
AI और डीपफेक पर शिकंजा: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) या सिंथेटिक रूप से तैयार की गई किसी भी सामग्री, जैसे डीपफेक वीडियो या ऑडियो, पर अब स्पष्ट रूप से लेबल लगाना या डिस्क्लेमर देना आवश्यक होगा। यह नियम कंटेंट बनाने और प्रकाशित करने वाले दोनों तरह के प्लेटफॉर्म्स पर लागू होगा।
पारदर्शिता और जवाबदेही: सामग्री हटाने के आदेश अब केवल वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ही दे सकेंगे और उन्हें इसका स्पष्ट कारण भी बताना होगा। इससे मनमाने ढंग से कंटेंट हटाने पर रोक लगेगी और प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।
मध्यस्थों की जिम्मेदारी बढ़ी: नए संशोधन IT अधिनियम की धारा 79 के तहत मध्यस्थों को मिलने वाली “सेफ हार्बर” (कानूनी सुरक्षा) को सीमित करते हैं। यदि प्लेटफॉर्म्स इन नियमों का पालन करने में विफल रहते हैं, तो वे अपनी कानूनी सुरक्षा खो सकते हैं और उन पर मुकदमा चलाया जा सकता है।
मंत्रालय के अनुसार, यह कदम डीपफेक और अन्य ऑनलाइन फ्रॉड से नागरिकों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है, जो हाल के दिनों में एक बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। इन नियमों का उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को संतुलित करते हुए गलत सूचना और डिजिटल अपराधों पर प्रभावी ढंग से रोक लगाना है।



