शहर में कथित रूप से पत्रकारिता की आड़ में गतिविधियों पर सवाल, प्रशासन से जांच व कार्रवाई की मांग

शहर में पिछले कुछ समय से स्वयं को पत्रकार बताने वाले कुछ व्यक्तियों की गतिविधियों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि ये लोग अलग-अलग कॉलोनियों में जाकर तथा कभी पुलिस प्रशासन के विरुद्ध प्रदर्शन और प्रतीकात्मक विरोध (जैसे पुतला दहन) के माध्यम से दबाव बनाने का प्रयास करते रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, इन गतिविधियों को लेकर यह आशंका जताई जा रही है कि कथित तौर पर पत्रकारिता की पहचान का उपयोग कर प्रशासनिक तंत्र पर अनुचित प्रभाव डालने की कोशिश की जा रही है। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में वास्तविक पत्रकारों और पत्रकार संगठनों के विरुद्ध भी आपसी मतभेद और गलतफहमियां पैदा करने की बातें सामने आ रही हैं, जिससे पत्रकारिता की छवि को नुकसान पहुंचने की चिंता व्यक्त की जा रही है।

इस पूरे मामले को लेकर अब संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में एक लिखित शिकायत पुलिस प्रशासन, उपायुक्त (डीसी) जालंधर, जिला जनसंपर्क अधिकारी (डीपीआरओ) जालंधर तथा पंजाब के मुख्यमंत्री को सौंप दी गई है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वे स्वतंत्र और जिम्मेदार पत्रकारिता के पक्षधर हैं तथा किसी भी प्रकार से पत्रकारिता की साख पर प्रश्नचिह्न लगने से समाज में गलत संदेश जाता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि तथ्यों की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि कौन लोग वास्तव में पत्रकारिता के मानकों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं और कौन केवल पहचान का दुरुपयोग कर रहे हैं।
प्रशासनिक स्तर पर इस मामले को लेकर अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि शिकायत प्राप्त होने के बाद संबंधित विभाग तथ्यों की जांच कर उचित कदम उठाएंगे।



