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देश के दो बड़े राज्यों में क्या है वैक्सीनेशन का आंकड़ा, जानें सबकुछ _indias vaccination story is also a quiet race between the two big states maharashtra and uttar pradesh

जानें यूपी और महाराष्ट्र के वैक्सीनेशन के आंकड़े. (सांकेतिक तस्वीर)

जानें यूपी और महाराष्ट्र के वैक्सीनेशन के आंकड़े. (सांकेतिक तस्वीर)

महाराष्ट्र (Maharashtra Covid Vaccination) ने वैक्सीनेशन की कुल संख्या के मामले में करीब चार महीने तक लीड हासिल की है. लेकिन बीते 12 दिनों में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) ने एकाएक तेज रफ्तार पकड़ी है. इस वक्त यूपी हर दिन महाराष्ट्र से ज्यादा टीकाकरण कर रहा है.

नई दिल्ली. भारत में वैक्सीनेशन की कहानी दो बड़े राज्यों महाराष्ट्र (Maharashtra) और उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बीच एक रेस सरीखी भी है. महाराष्ट्र ने वैक्सीनेशन की कुल संख्या के मामले में करीब चार महीने तक लीड हासिल की है. लेकिन बीते 12 दिनों में उत्तर प्रदेश ने एकाएक तेज रफ्तार पकड़ी है. इस वक्त यूपी हर दिन महाराष्ट्र से ज्यादा टीकाकरण कर रहा है. यूपी की ये रफ्तार देशभर में वैक्सीनेशन के आंकड़ों में ईंधन की तरह भी काम कर रही है. देश में बीते दो दिनों में 45 लाख वैक्सीन डोज लगाए गए हैं. उदाहरण से समझें- महाराष्ट्र ने अब तक कुल 2.13 करोड़ वैक्सीन डोज लगाए हैं. ये देश में किसी भी राज्य से ज्यादा हैं और जनवरी में वैक्सीनेशन कार्यक्रम शुरू होने के बाद से महाराष्ट्र रोजाना वैक्सीनेशन के मामले में आगे चल रहा था. सबसे ज्यादा 5.4 लाख डोज 26 अप्रैल को लगाए गए थे. लेकिन 14 मई के बाद उत्तर प्रदेश ने हर दिन सबसे ज्यादा वैक्सीन डोज लगाए हैं. यूपी में अब तक 1.7 करोड़ वैक्सीन डोज लगाए गए हैं. ये आंकड़े कोविन ऐप के आधिकारिक डेटा पर आधारित हैं. लेकिन अगर प्रति दस लाख की आबादी के हिसा से वैक्सीनेशन का आंकड़ा देखा जाए तो यूपी आखिरी नंबर पर आता है. यूपी में प्रति दस लाख आबादी पर 73,500 डोज दिए गए हैं तो महाराष्ट्र में ये आंकड़ा 1.7 लाख है. क्या कहती हैं शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदीमहाराष्ट्र से शिवसेना की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने न्यूज़18 को बताया-सबसे प्रमुख कारण ये है कि महाराष्ट्र को पर्याप्त संख्या में वैक्सीन नहीं मुहैया कराई जा रही है. हम 45+ आयु समूह पर फोकस कर रहे हैं और ये बात एक तथ्य है कि हमारे मुंबई और पुणे के वैक्सीनेशन सेंटर्स ने युद्ध स्तर पर काम किया है. क्या कहते हैं यूपी के अधिकारी वहीं यूपी के अडिशनल चीफ सेक्रेटरी (इंफॉर्मेशन) नवनीत सहगल का कहना है- प्रदेश में अब वैक्सीनेशन की संख्या और ज्यादा बढ़ सकती है क्योंकि 18-44 आयु समूह के लिए सभी जिलों में इसे खोला जा रहा है. वर्तमान में इस आयु समूह के लिए वैक्सीनेशन 23 जिलों में चल रहा है. इस वक्त हम सबसे ज्यादा संख्या में लोगों का वैक्सीनेशन कर रहे हैं. हमारे पास वैक्सीन की संख्या पर्याप्त है.
18+ के वैक्सीनेशन के मामले में यूपी से पिछड़ा महाराष्ट्र 18 से 44 आयु समूह के वैक्सीनेशन के मामले में महाराष्ट्र इस वक्त यूपी से काफी ज्यादा पिछड़ गया है. 18+ वालों के वैक्सीनेशन की शुरुआत 1 मई से हुई है. यूपी अब तक इस कैटगरी में 13.61 लाख डोज वैक्सीनेशन कर चुका है. वहीं महाराष्ट्र में संख्या महज 7.47 लाख ही है. प्रियंका चतुर्वेदी का कहना है कि यूपी को हाल में वैक्सीन का बड़ा हिस्सा दिया गया है. उन्होंने कहा-‘हमने 18-44 आयु समूह के लिए ग्लोबल टेंडर निकाले हैं लेकिन फाइज़र और मॉडर्ना को क्षतिपूर्ति के नियमों से दिक्कत है.’ वो कहती हैं कि राज्यों और प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन के मूल्य को लेकर भी भेदभाव किया गया है. अब राज्य सरकार को परेशानियां इसलिए हो रही हैं क्योंकि वैक्सीन उत्पादक पहले अस्पतालों तक वैक्सीन पहुंचाना चाहते हैं. विनीत सहगल कहते हैं कि यूपी में वैक्सीनेशन की संख्या बढ़ रही है क्योंकि गांवों में वैक्सीन के प्रति झिझक खत्म करने को लेकर राज्य बहुत मेहनत कर रहा है. उन्होंने कहा-हमारे पास 97 हजार गांवों में सर्विलांस कमेटी हैं जो वैक्सीनेशन और टेस्टिंग पर कैंपेन चला रही हैं. हमने ‘मेरा गांव कोरोना मुक्त’ नाम का एक पब्लिक कैंपेन भी चलाया है. इस कैंपने के तहत कोरोना के मुक्त होने वाले गांवों के लिए प्राइज मनी भी रखी गई है. इस कैंपेन में वैक्सीनेशन को भी शामिल किया गया है. यूपी के 68 प्रतिशत गांवों में कोरोना का एक भी एक्टिव केस नहीं है.





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