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PPR MALL के पास ऋषि नगर में ‘लैंड यूज’ के नियमों की धज्जियां: क्या सरकारी कुर्सी पर बैठकर उल्लंघन करने वालों को संरक्षण दे रहे हैं बिल्डिंग इंस्पेक्टर?

जालंधर (विशेष संवाददाता): जालंधर नगर निगम के अंतर्गत आने वाले PPR MALL के पास ऋषि नगर में रिहायशी फ्लैटों के अवैध कमर्शियल रूपांतरण (Commercial Conversion) का मामला अब गंभीर होता जा रहा है। एक तरफ जहां पंजाब सरकार अवैध निर्माण और लैंड यूज के उल्लंघन के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रही है, वहीं सूत्रों की माने तो दूसरी तरफ निगम के ही कुछ अधिकारी अपनी रिपोर्टों के जरिए इन नियमों को कागजों तक सीमित रखने में जुटे हैं।

सूत्रों के अनुसार ताजा मामला बिल्डिंग इंस्पेक्टर (BI) गौरव ठाकुर की उस रिपोर्ट से जुड़ा है, जिसने विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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क्या है पूरा विवाद?

PPR MALL के पास ऋषि नगर के रिहायशी फ्लैटों को दुकानों, शोरूम और ऑफिसों में बदल दिया गया है। यह सीधे तौर पर ‘चेंज ऑफ लैंड यूज’ (CLU) और पंजाब बिल्डिंग बाय-लॉज़ का उल्लंघन है। शिकायतकर्ता ने इस संबंध में PGRS (पोर्टल) पर शिकायत (No. 20250571620) दर्ज कराई थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि बिना किसी ठोस ग्राउंड एक्शन के इस शिकायत को बार-बार ‘Resolved’ (निपटारा) मार्क किया जा रहा है।

BI की रिपोर्ट: समाधान या सिर्फ खानापूर्ति?

बिल्डिंग इंस्पेक्टर गौरव ठाकुर ने अपनी रिपोर्ट में तर्क दिया है कि:

“साइट की जांच की गई। संपत्तियां काफी समय से बनी हुई हैं और वहां कोई नया निर्माण नहीं देखा गया।”

यहां सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि:

  1. क्या किसी बिल्डिंग का ‘पुराना’ होना उसे रिहायशी से कमर्शियल में बदलने का कानूनी अधिकार दे देता है?
  2. शिकायत ‘अवैध कमर्शियल इस्तेमाल’ की थी, ‘नए निर्माण’ की नहीं। तो फिर BI ने अपनी रिपोर्ट में Change of Land Use (CLU) के मुद्दे को पूरी तरह दरकिनार क्यों किया?

सफेद हाथी साबित हो रहा है ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (ATR)

जानकारों का कहना है कि जब किसी रिहायशी फ्लैट का नक्शा (Sanction Plan) रिहायशी तौर पर पास होता है, तो उसका कमर्शियल इस्तेमाल गैरकानूनी है। चाहे वह निर्माण 10 साल पुराना हो या 20 साल। बिल्डिंग इंस्पेक्टर और ATP (असिस्टेंट टाउन प्लानर) द्वारा ‘ओरिजिनल सैंक्शन प्लान’ की जांच न करना उनकी पेशेवर कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करता है।

हायर अथॉरिटी से उठ रही है जांच की मांग

अब यह मामला पंजाब सरकार के आला अधिकारियों और निगम कमिश्नर के दरबार में पहुँच गया है। शिकायतकर्ता ने अपनी तीसरी अपील में स्पष्ट किया है कि BI गौरव ठाकुर की रिपोर्ट तथ्यों से परे और उल्लंघन करने वालों को बचाने की एक कोशिश है।

क्षेत्रवासियों और जागरूक नागरिकों का सवाल है: * क्या जालंधर नगर निगम के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं या सिर्फ कुर्सी पर बैठकर फाइलों को इधर-बधर घुमा रहे हैं?

  • क्या कमिश्नर साहब इस मामले में BI और संबंधित ATP की जवाबदेही तय करेंगे?

👉 इस मामले में संबंधित अधिकारी (BI) से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक जवाब प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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